Tuesday, 3 January 2017

Resale Flat खरीदने से पहले ध्यान रखें ये बातें





Regrob की तरफ से आपको और आपके परिवार को नव वर्ष (2017) की हार्दिक शुभ कामनाये |
हर व्यक्ति खुद के घर का सपना देखता है। अपने सपने को पूरा करने के लिए वह मकान बनाता है या कोई फ्लैट बुक करता है। लेकिन जो लोग घर के बनने तक का इंतज़ार नहीं करना चाहते, वे बने बनाये घर या फ्लैट खरीदने से नहीं हिचकिचाते। जिन फ्लैटों या घरो को दूसरी बार बेचा जाता है उन्हें रीसेल फ्लैट कहा जाता है। नए घरो या फ्लैटों की तुलना में रीसेल होने वाले फ्लैट या घरो की कीमत कम होती है। किसी भी फ्लैट या घर की कीमत उस फ्लैट या घर की उम्र, इलाके व निर्माण कंपनी पर निर्भर करती है। हालांकि की रीसेल फ्लैट को खरीदने के लिए आपके पास जमा राशि मौजूद होनी होनी बहुत जरुरी है। कम लोन मिलने पर आपकी जमा पूंजी आपके काम आएगी।




रीसेल मकान या फ्लैट को खरीदते वक्त इन बातों को ध्यान में रखना बहुत जरुरी है :-चार्ज एवं फीस


किसी भी घर या फ्लैट खरीदते वक्त सरकार द्वारा लगाए गए बहुत से शुल्कों का भुगतान करना पड़ता है। इसमें पंजीकरण फीस, स्टांप फीस, हस्तांतरण फीस एवं उपयोगिता हस्तांतरण शुल्क शामिल हैं।किसी भी संपत्ति को खरीदने के लिए अगर आप किसी एजेंट की मदद लेते है तो इसमें उसकी भी शुल्क जुड़ जायगा। अतः इन सारे शुल्कों को जोड़ने पर आप संपत्ति की कुल कीमत का अंदाज़ा लगा पाएंगे।

मौजूदा लोन अक्सर लोग किसी कारणवश अपनी संपत्ति की राशि बढ़ा देते हैं। ऐसे स्थिति में संपत्ति के सारे दस्तावेज़ बैंक के पास होते हैं और कर्ज़े के पूर्ण भुगतान के बाद दस्तावेज़ मकान मालिक को वापस मिलते हैं। यदि संपत्ति की राशि बढ़ी हुई थी तो मकानदार के पास ऋणभार प्रमाणपत्र होना चाहिए। कर्ज़े में डूबे मकान की खरीददारी एक घाटे का सौदा साबित हो सकती है।


Resale  मकान की आयु :-



मकान की मजबूती उसकी उम्र पर निर्भर करती है, मतलब मकान कितना पुराण है। एक अच्छे घर या फ्लैट की उम्र 1-5 साल या अधिकतम 10 साल होनी चाहिए। बैंक से लोने लेने की स्थिति में इस बात पर ध्यान देना बहुत जरूरी है क्योंकि कोई भी बैंक ज्यादा पुराने मकानों या फ्लैटो पर जल्दी लोन नहीं देती। लोन पाने के लिए आपको बैंक की मिन्नते या बैंक के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।


फ्लैट या मकान खरीदने के लिए जरुरी दस्तावेज़ :-


अगर आप कोई भी घर या फ्लैट खरीदना चाहते है तो आपके पास को खरीदने से पहले खाता प्रमाण पत्र, टैक्स रसीद एवं इमारत का अपरूवल प्लैन जैसे दस्तावेज़ों की जांच कर लेनी चाहिए। सभी दस्तावेज़ किसी विशेषज्ञ या वकील द्वारा सत्यापित किए जाने चाहिए। कुछ दस्तावेज़ों की आवश्यकता आपके शहर पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, खाता प्रमाण पत्र बेंगलुरू जैसे शहर में एक अनिवार्य दस्तावेज़ मन जाता है। दस्तावेज़ के शीर्षक की स्पष्ट रूप से जांच कर लेनी चाहिए । अगर आपको कुछ ना समझ आये तो आप वकील की मदद लें।


संपत्ति का मूल्यांकन करना बहुत जरुरी है :-


संपत्ति के सही दाम चुकाने के लिए उसका मूल्यांकन करें। अतः जल्दबाज़ी में आप धोख़ा खा सकते हैं। बने बनाए घर में शिफ्ट होने के दो फायदें हैं एक आपकी ईएमआई बचती है और दूसरा आपका किराया। यदि आप फ्लैट बुक करते हैं तो आपको फ्लैट के तैयार होने तक इंतज़ार करना पड़ता है। जिसमें करीब 2-3 साल निकला जाते हैं।


पड़ोसियों से पूछताछ करनी बहुत ही जरुरी है :- 


आप जिस इलाके में मकान या फ्लैट खरीदने जा रहे हैं उससे जुड़ी जानकारी एवम वहां बिजली, पानी एवं अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता को वहां के रहने वाले लोगों से जरूर जाने |



होम लोन और प्रोपर्टी लोन में क्या अन्तर है :-



बहुत से व्यक्ति लोन और प्रोपर्टी लोन का अन्तर नहीं समझ पाते हैं और भ्रमित हो जाते हैं। कभी-कभी अपनी सुविधा के अनुसार इसका महत्व समझे बिना एक के स्थान पर दूसरे की शर्तों को बता देते हैं, जबकि दोनों प्रकार के लोन में भारी अन्तर है।


होम लोन और प्रोपर्टी लोन का अन्तर समझे :-



इसमें कोर्इ संदेह की बात नहीं है कि होम लोन बने बनाये मकान के लिए (जैसे- फ्लैट) लिया जाता है या उस पर लिया जाता है, जो पूरा मकान बन चुका है। इससे यह तात्पर्य है कि - होम लोन मकान बनाने के लिए या बना बनाया मकान खरीदने के लिए लिया जाता है। होम लोन और प्रोपटी लोन में प्रमुख अंतर यह है कि प्रोपर्टी लोन पर आय कर में कोर्इ भी छूट नहीं होती है, जबकि होम लोन पर छूट मिल जाती है।

उदाहरण के लिए होम लोन की प्रिंसिपल राशि का भुगतान कराने की डेढ़ लाख रुपये तक की राशि पर आयकर की छूट मिल जाती है। उसी तरह होम लोन पर लिया जाने वाला दो लाख तक के ब्याज पर आयकर की छूट होती है। दूसरी तरफ प्रॉपर्टी लोन पर आयकर में छूट नहीं दी जाती। हॉं, व्यवसायी आयकर के अन्य प्रावधानों के तहत आयकर की छूट पाने के लिए क्लेम भी करते हैं। प्रोपर्टी लोन किसी भी परियोजना के लिया जा सकता है, जबकि होम लोन केवल घर बनाने या बना बनाया घर खरीदने के लिए ही लिया जाता है।

दूसरे शब्दों में आप अपनी प्रोपटी को बैंक के पास गिरवी रख कर बच्चों की उच्च शिक्षा, व्यवसाय का विस्तार, शादी या किसी आकस्मिक बीमारी के इलाज के लिए प्रापर्टी लोन ले सकते हैं। प्रोपर्टी लोन का भुगतान व्यक्ति को किया जाता जिसके नाम प्रॉपर्टी होती है, जबकि होम लोन का भुगतान बिल्डर या मकान बेचने वाले किया जा सकता। दोनो मामलों में बैंक जो लोन देता है, उन सभी दस्तावेजो की पूरी जांच करता है, जिन दस्तावेज़ों के आधार पर लोन लिया जाता है। उधार देने के पहले ये बैंक दस्तावेजो के संबंध में बहुत से प्रश्न भी पूछते है।

दोनो केस में एक समानता यह भी होती है कि अगर आप लोन अदा करने में असमर्थ होते है तो बैंक उस प्रोपर्टी को बेचने का अधिकार रखता है, जिस के आधार पर लोन दिया गया है या जिस प्रॉपर्टी को गिरवी रख कर लोन दिया गया है। होम लोन के लिए ज्यादा दस्तावेज देने पड़ते हैं। ऐसी प्रकार दोनों की ब्याज दरों में भी अन्तर होता है। होम लोन पर ब्याज दर कम होती है, जबकि प्रोपर्टी लोन पर ब्याज दर आधिक होती है। बाजार में प्रतिस्पर्धी लोन देने वाले निकायों की उपलब्धता है।


निष्कर्षत :-


होम लोन ग्रह के निमार्ण के लिए लिया जाता है। दूसरी ओर प्रोपर्टी लोन उस संपत्ति पर लिया जाता है, जो पहले ही बनी हुर्इ हो। बहुत कम व्यक्ति ही प्रोपर्टी पर लोन लेते हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते हैं कि वे अपनी बानी बनाई प्रोपर्टी को किन्ही कारणों से बिक जाय। इसीलिए जरुरत पड़ने पर अक्सर लोग प्रोपर्टी को गिरवी रखने के बजाय गोल्ड लोन या पर्सनल लोन लेने का विकल्प चुनते है।


अधिक जानकारी के लिए संपर्क करेफोन नंबर - +91-9529331331अथवा मेल करे –info@regrob.com



Monday, 2 January 2017

2017 में Regrob दुवारा सभी बैंकों से पाएं सस्ते होम लोन



गिरते ब्याज दर से सबसे अधिक लाभ ग्रह ऋण (होम लोन) लेने वालों को होगा। सही बैंक व सही लोन विकल्प को चुनकर आप इस मौके का सही उपयोग कर सकते है। बैंक से लोन (क़र्ज़) लेते वक्त कर्ज़दार केवल बैंक की ब्याज दर पर ही अपनी नज़र ना टिकाए क्योकि ईएमआई (लोन की क़िस्त) चुकाने से पहले आपकी आधी रकम प्रोसेसिंग फीस व ड़ाउन पेमंट करने में खर्च हो जाएगी। आपकी सुविधा के लिए हमने 1 लाख रुपए के आधार पर अन्य बैंकों द्वारा प्रदान की जा रही लोन की क़िस्त (ईएमआई) की सूची तैयार की है। इस सूची अनुसार आप 30 लाख रुपए पर बनने वाली ईएमआई का अनुमान लगा सकते हैं तथा अपनी ब्याज दर की भी गणना कर सकते हैं।


2017 में होम लोन देने वाले बैंको की सूचि :-


1- ऐक्सिस बैंक :-


अगर आप ऐक्सिस बैंक से 15 साल के लिए 1 लाख का होम लोन लेते हैं तो फिक्स्ड़ रेट के आधार पर आपको हर महीने 1,184 तथा फ्लोटिंग रेट पर 1,053 की मासिक क़िस्त (ईएमआई) चुकानी पड़ सकती है। यदि आप  20 साल के लिए फिक्स्ड़ व फ्लोटिंग रेट पर मासिक क़िस्त (ईएमआई) की राशि 1,084 एवं 942 रुपए होगी।

2- बैंक ऑफ बड़ौदा :-


बैंक ऑफ बड़ौदा फिक्स्ड़ रेट पर होम लोन प्रदान नहीं करता । फ्लोटिंग रेट पर 15 ओर  20 सालों के लिए आपकी मासिक क़िस्त (ईएमआई) की राशि क्रमानुसार 1,053 एवं 942 रुपए होगी।

3- बैंक ऑफ महाराष्ट्र :-


कुछ सरकारी एवम प्रइवेट बैंकों की तरह बैंक ऑफ महाराष्ट्र भी फिक्स्ड़ रेट पर होम लोन नहीं देता | फ्लोटिंग रेट पर 15 एवं 20 सालों के लिए आपकी मासिक क़िस्त (ईएमआई) की राशि क्रमानुसार 1,056 एवं 945 रुपए होगी।

4- भारतीय स्टेट बैंक :-


आमतोर पर होम लोन लंबे समय के लिए लिया जाता है। अन्य सरकारी एवम प्रइवेट बैंकों की तरह भारतीय स्टेट बैंक भी 15 व 20 साल की अवधि के लिए फिक्स्ड़ रेट पर होम लोन नहीं देता | अतः 15 साल के लिए फ्लोटिंग रेट पर आपकी मासिक क़िस्त (ईएमआई) की रकम 1,047 व 20 साल के लिए आपकी मासिक क़िस्त की रकम (ईएमआई) 935 रुपए होगी।

5-पंजाब नेशनल बैंक :-


पंजाब नेशनल बैंक ने अपने क्लाइंट को फिक्स्ड़ एवं फ्लोटिंग दोनों दरों पर होम लोन की सुविधा उपलब्ध करता है। यदि आप पंजाब नेशनल बैंक से फिक्स्ड़ रेट पर होम लोन (ग्रह ऋण) लेते हैं तो 15 साल के लिए आपकी मासिक क़िस्त (ईएमआई) 1,081 व 20 साल के लिए आपकी मासिक kist (ईएमआई) 972 रुपए होगी। यदि इसी अवधि के आधार पर आप फ्लोटिंग रेट पर कर्ज़ उठाते हैं तब आपकी मासिक क़िस्त (ईएमआई) क्रमानुसार 1,050 व 935 रुपए होगी।

6-एचडीएफसी बैंक :-


यदि आप एचडीएफसी बैंक से भी फ्लोटिंग रेट पर 15 व 20 साल के लिए, लिए गए होम लोन पर आपकी मासिक क़िस्त (ईएमआई) 1,047 व 935 रुपए की ही बनेगी। हालांकि कुछ मामलों में, एचडीएफसी बैंक लोन के प्रारंभिक वर्षो में फिक्स्ड़ रेट की सेवा प्रदान करती है लेकिन उसके बाद आपकी मासिक क़िस्त (ईएमआई) फ्लोटिंग रेट में बदल जाती है।

7-आईसीआईसीआई बैंक :-


आईसीआईसीआई बैंक भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट बैंक है। ये बैंक भी  फिक्स्ड़ एवं फ्लोटिंग रेट पर होम लोन प्रदान करता है। 15 या 20 साल के लिए फिक्स्ड़ रेट पर आपकी मासिक क़िस्त (ईएमआई) 1,059 एवं 949 रुपए होगी, ओर 15-20 साल के लिए फ्लोटिंग रेट पर मासिक क़िस्त (ईएमआई) 1,047 एवं 935 रुपए होगी। आईसीआईसीआई बैंक बीच-बीच में बैंक अपने ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव करता रहता  है। इस उतार-चढ़ाव का असर आपकी मासिक क़िस्त (ईएमआई) पर पड़ता है।



निष्कर्ष


2015 में ब्याज दर काफी कम हुए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने 2015 में ब्याज दर को लगभग 125 बेसिक पॉइंट तक कम किया था। फिरभी ग्राहकों तक इसका पूरा लाभ नही पहुंच पाया। 2015  साल को देखते हुए निवेशकों को इस साल ब्याज दरों की कटौती से खास उम्मीदे नहीं है। यदि आप ब्याज के कम होने का इंतज़ार कर रहे हैं, तो शायद ऐसा नहीं होगा। जैसे की हमने पहले भी कहां है कि केवल ब्याज दर को देखकर ही किसी भी बैंक से होम लोन नहीं लेना चाहिए। बल्कि बैंक की सर्विस, प्रोसेसिंग फीस व प्री-पेमेंट शुल्क को ध्यान में रखकर अपने लिए एक सही निर्णय लेना चाहिए। इसलिए फैसला लेने से पहले सारी जानकारी इकट्ठा करें। सरकारी बैंक से लिया गया होम लोन आपको सस्ता तो पड़ेगा लेकिन इन बैंकों की सेवा की हम गारंटी नहीं ले सकते। इन बैंकों से कर्ज़ा लेने में होने वाली भाग-दौड़ व मगजमारी से आप वाकिफ तो होंगे ही।



होम लोन लेने वाले याद रखें बैंक किसी का सगा नहीं नही होता :- 



जब आप होम लोन (गृह ऋण) लेने जाते हैं, तो बैंक तमाम चीजें आपसे मांगता है- जैसे तीन साल का आईटी रिटर्न, 6 महीने का बैंक स्टेटमेंट, सैलरी स्ल‍िप, आईडी प्रूफ, एड्रेस प्रूफ, इत्यादि। उस वक्त आप जमकर भागदौड़ करते हैं और अंतत: लोन मिलने के बाद आप खुश होकर सुकून से बैठ जाते हैं और मासिक क़िस्त (ईएमआई) देने लगते हैं। लेकिन सावधान रहना चाहिए ! अगर आप वाकई में होम लोन को लेकर सुकून से बैठ गये हैं, तो अभी सचेत हो जाइये नहीं तो लाखों रुपए आपकी जेब से कम सकते हैं।

अगर आप होम लोन लेने के बाद वाकई में सुकून से बैठना चाहते है, तो इन बातों की आज से ही गांठ बांध लीजिये :-


1. सरकारी बैंक हो या प्राइवेट बैंक। बैंक पर भरोसा करके कभी सुकून से मत बैठिये | हर तीन महीने पर बैंक जायें और अपने होम लोन का स्टेटस पूछें। नहीं तो नेट बैंकिंग के जरिये से चेक करते रहें।

2. अगर आपने फ्लोटिंग इंटरेस्ट पर होम लोन लिया है तो जब-जब आरबीआई लोने पर इंटरेस्ट की दरें घटाये या बढ़ाये, तब-तब चेक करना चाहिए कि वह दरें आपके अकाउंट पर रिफलेक्ट हुईं भी है या नहीं। क्योंकि ब्याज दर बढ़ने पर बैंक प्रत्येक होम लोन अकाउंट में ब्याज की दर बदलते रहते हैं, लेकिन ब्याज दर घटने पर बैंक खुद से सिस्टम में जाकर ब्याज दर बदलते नहीं। अगर ग्राहक सो गया तो बैंक उसी बढ़ी हुई दर पर ब्याज लेते रहते हैं।

3. हर साल अप्रैल महीने में बैंक जाकर अपना बैंक अकाउंट स्टेटमेंट जरूर लेना चाहिए। इससे आपको पता चलता रहेगा कि एक वर्ष में आपने कितना लोन कम किया है।

4. यह मत सोचें कि जब 50 हजार या 1 लाख रुपए होगा, तब प्री-पेमेंट करेंगे। अगर आपके पास 5 हजार या 10 हजार भी आता है, तो लोन अकाउंट में जका करें।

5. कई बार बैंक आप पर बहुत सी तरह की हिडेन कॉस्ट अचानक से लगा देता है। कई बार ऐसा होता है कि समय से मासिक क़िस्त (ईएमआई) देने के बाद भी बैंक आपसे लेट फीस का चार्ज लगा लेता है, अगर ऐसा होता है, तो आप तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें।

6. अगर आज आपको पता चले कि बैंक आपसे ज्यादा ब्याज दर ले रहा है, तो तुरंत शिकायत करें और अपनी ब्याज दर कम करवायें। उसके बाद देखें कि कब से बैंक ने आप पर ज्यादा ब्याज लगाया है। उस स्थ‍िति में बैंक से कहें कि वो पैसा रिवर्स कर आपके लेजर बैलेंस से घटाये या फिर ब्याज की समय अवध‍ि कम करे। यदि बैंक इस बात से मना कर देता है, तो आप आरबीआई में इसकी श‍िकायत कर सकते हैं।


अधिक जानकारी के लिए संपर्क करेफोन नंबर - +91-9529331331अथवा मेल करे –info@regrob.com

Regrob infrastructure की तरफ से आप सभी को नव वर्ष 2017 की हार्दिक शुभ कामनाये, हमारी ईश्वर से ये ही प्राथना है कि आपका जीवन खुशियो से भरा रहे,





हम आपके लिए लेकर आये है खुसियो कि सौगात, हर कोई चाहता है कि नव वर्ष के उप्लक्स में वो अपनों को बहुत सी खुशिया प्रदान करे, ओर घर खरीने से बड़ी ख़ुशी क्या होगी व्यक्ति के जीवन में, परंतु आज के इस महगाई के दोर में घर खरीदना या बनाना इतना आसान नही है, इसलिए हम आपकी खुशियो का ख्याल रखते हुए, आपके लिए लेकर आये है, होम लोन कि सुविधा जो आपको घर दिलाने में आपकी मदद करेगा, हम आपको सभी बैंको से लोन की सुविधा उपलभ्द करते है, जो आप सभी की सुहूलियत से हिसाब से ही होगा | ओर कम से कम बियाज़ दर पर हम आपको होम लोन की सुविधा उपलभ्द करेगे |
मै आसा करता हूँ कि इससे लाखो भारतीयों की घर खरीदे की समस्या का समाधान हो जयगा | 
ओर उनका घर बनाने का सपना भी साकार हो जायगा | जिससे वो अपने परिवार के साथ अपना जीवन सुखमय व्यतीत कर सके |



आओ जाने की होम लोन कैसे लिया जाता है ओर इसके लिए क्या-क्या चीज़ों की जरूरत होती है :-



आपको घर फ्लैट खरीदना है, और आपको बैंक से लोन की जरूरत है। तो यह तो पक्का है कि आपको बहुत भाग-दौड़ करनी पड़ेगी। लेकिन हां इस भाग-दौड़ को आप इन जरुरी बातों को ध्यान से पालन कर आसान बना सकते हैं। आपको हम बताने जा रहे हैं, कि घर या फ्लैट खरीदते वक़्त होम लोन कैसे लें, आपको क्या-क्या दस्तावेजो को तैयार रखने की जरूरत होगी।


 बहुत से बैंक होम लोन के फॉर्म इंटरनेट पर मुहैया कराते हैं। अगर आपके बैंक की साइट पर फॉर्म उपलभ्द है, तो आप डाउनलोड कर लें। उसके बाद निम्न दस्तावेजों की प्रतिलिपि तैयार करें। याद रहे कि, प्रत्येक प्रतिलिपि पर आपके हस्ताक्षर होने होने बहुत जरुरी है।



आपसे जुड़े दस्तावेजो की सूचि :-



1.  फॉर्म पूर्ण रूप से भरा हुआ होना चाहिए। (अगर आपके कुछ समझ में नही आ रहा है , तो उसे छोड़ दे, बैंक के कर्मचारी आपको बतायेंगे कि वहां क्या लिखना है।)


2.  छह महीने की सैलरी स्लिप होनी बहुत जरुरी है। जिस कंपनी में आप जॉब करते हैं, उस कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट से सैलरी स्लिप जरूर प्राप्त करे।


3.  छह महीने का बैंक स्टेटमेंट होनेआ भी बहुत जरुरी है। (जिस बैंक अकाउंट से सबसे ज्यादा ट्रांजैक्शन करते हैं, उसका ही बैंक स्टेटमेंट होना चाहिए।)


4.  तीन पासपोट साइज फोटो ग्राफ, यदि किसी के साथ अकाउंट ज्वाइंट है, तो उसकी भी पासपोट साइज फोटो चाहिये।


5.  एचआर लेटर भी होना जरुरी है। जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा हो कि आप कबसे इसी कंपनी में नौकरी कर रहे हैं।


6.  पूरा एड्रेस प्रूफ। जैसे कि आधार कार्ड, पासपोर्ट, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट, आदि।

7.  आईडी प्रूफ। पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, राशन कार्ड, सरकारी मान्यता प्राप्त कार्ड, सरकारी बैंक की पासबुक, आदि।


8.  यदि आपने पहले कोई लोन ले रखा है, तो उसका पिछले 6 माह का लोन स्टेटमेंट।


9.  यदि आप पहले से किसी भी संपत्ति के मालिक हैं, तो उसका भी विवरण देना चाहिए।


10.         कोई भी स्थानीय व्यक्त‍ि जो आपको अच्छी तरह से जानता हो। उसका भी आईडी प्रूफ अवस्ये दे ।




घर या फ्लैट से जुड़े दस्तावेजो की सूचि :-




1.  यदि आप घर या फ्लैट खरीद रहे हैं, तो बिल्डर से सभी दस्तावेज़ों को मांगें और उसकी एक कॉपी बैंक को जरूर मुहैया करायें।


2.  फ्लैट या घर की टेक्निकल रिपोर्ट भी दे। कई बैंक इस रिपोर्ट खुद तैयार करवाते हैं, तो उस रिपोर्ट के लिये आपको 1500 से 2500 रुपए तक का चेक बैंक को देना होगा।


3.  फ्लैट या घर की लीगल रिपोर्ट। आपको बिल्डर बिल्डिंग की लीगल रिपोर्ट देगा, फ्लैट की नहीं देगा। इसलिये आप किसी सीनियर वकील से फ्लैट की लीगल रिपोर्ट जरूर प्राप्त करें।


4.  इस रिपोर्ट पर वकील के हस्ताक्षर एवं सील लगी होनी चाहिए। हालांकि कई बैंक अपने वकील से लीगल इंक्वॉयरी करवाते हैं, आप अपने पास दस्तावेज के रूप में इस रिपोर्ट रखने के लिये बैंक से उसकी प्रतिलिपि मांग सकते हैं।


5.  घर या फ्लैट पर बिल्डर और लैंड ओनर की एनओसी भी जरूर होनी चाहिए। अगर आपका फ्लैट लैंड ओनर शेयर में है, तो बिल्डर की एनओसी, बिल्डर शेयर में है, तो लैंड ओनर एनओसी तो चाहिए ही।


6.  जो व्यक्ति आपको घर बेच रहा है। उसके पैन कार्ड, आधार कार्ड, आदि की प्रतिलिपि आपके पास होनी चाहिए।


7.  नये फ्लैट का कॉस्ट ब्रेक-अप। यह कॉस्ट ब्रेक-अप आपको वो देगा जिससे आप फ्लैट खरीद रहे हैं। रीसेल फ्लैट में यह लागू नहीं होता है।


8.  अगर आपके बिल्डर ने किसी भी अन्य बैंक से लोन लेकर बिल्डिंग बनायी है, तो उस बैंक से एनओसी लेनी पड़ती है, जिसको बैंक एनओसी कहते है।

9.  सेलडीड का ड्राफ्ट। यह वो दस्तावेज है, जिस पर रजिस्ट्री होनी है। बैंक उसकी एक कॉपी पहले से मांगता है।

10.         वर्तमान वित्तीय वर्ष की प्रॉपर्टी की टैक्स रसीद।


11.         नगर निकाय से एनओसी लेनी चाहिए, जो यह बताता हो, कि यह फ्लैट बेचने वाले के नाम पर ही है।


12.         बिल्डिंग का लेआउट प्लान जो बिल्डिंग बनाते वक़्त नगर निकाय द्वारा पास किया गया हो। अगर बिल्ड‍िंग प्लान के अनुरूप से नहीं बनी है, तो आपको लोन भी नहीं मिल सकेगा |


हम आपके जीवन में खुशियो की कामना करते है, कि आपके जीवन का ये नया साल बहुत खुशिया लाये |



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